भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। शुक्रवार को भारत के लिए कच्चे तेल का औसत आयात मूल्य गिरकर 68.86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह आंकड़ा उस समय के बाद सबसे कम है जब पश्चिम एशिया में तनाव शुरू हुआ था। एक समय ऐसा भी था जब यह कीमत 157 डॉलर के पार पहुंच गई थी।

हालांकि, आम जनता को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती का इंतजार है, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी पुराने नुकसान की भरपाई करने में जुटी हैं। सरकार ने भी पिछले कुछ समय में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए खजाने से करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसकी भरपाई अभी बाकी है।

अभी की स्थिति देखें तो सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) के लिए पेट्रोल पर 5 से 6 रुपये प्रति लीटर का मार्जिन मिल रहा है, लेकिन डीजल पर अभी भी करीब 8 से 10 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। भारत अपनी जरूरत का 88 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। जब तनाव चरम पर था, तब कंपनियों को पेट्रोल पर 26 रुपये और डीजल पर करीब 82 रुपये तक का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।

कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की संभावना और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा शिपमेंट फिर से शुरू होने के कारण आई है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि सरकार ने अलग-अलग देशों से तेल खरीदकर और बुनियादी ढांचे को मजबूत करके आम लोगों को महंगाई की मार से बचाने की पूरी कोशिश की है। फिलहाल, सरकारी तेल कंपनियों और पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से कीमतों में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

विवरण (Details) स्थिति (Status)
कच्चे तेल की कीमत (Crude Oil) $68.86 प्रति बैरल
पेट्रोल मार्जिन (Petrol Margin) ₹5-6 प्रति लीटर (मुनाफा)
डीजल मार्जिन (Diesel Margin) ₹8-10 प्रति लीटर (नुकसान)
तेल आयात निर्भरता (Import) 88% से अधिक

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