रायपुर के एक डॉक्टर के साथ हुए मामले में उपभोक्ता फोरम ने मारुति सुजुकी को एक बड़ा झटका दिया है। रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उनके डीलर नेक्सा मैग्नेटो को दोषी ठहराते हुए आदेश दिया है कि वे ग्राहक को या तो नई E-20 पेट्रोल के अनुकूल कार दें या फिर पूरी रकम वापस करें। यह मामला डॉक्टर प्रेमराज देवता की ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस कार से जुड़ा है, जिसे उन्होंने जून 2024 में खरीदा था।

शिकायत के अनुसार, कार खरीदने के कुछ महीनों बाद ही नवंबर 2024 में इसके इंजन में गंभीर समस्या आने लगी। जांच लैब में यह बात सामने आई कि कार का इंजन देश में मिलने वाले E-20 इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के साथ सही से काम नहीं कर रहा था। फोरम ने इसे ‘सेवा में कमी’ और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ माना। कोर्ट ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर ग्राहक को नई गाड़ी देने या करीब 20.50 लाख रुपये का रिफंड देने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने रिफंड के साथ-साथ मानसिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये और कानूनी खर्च के लिए 10 हजार रुपये का हर्जाना भी देने को कहा है। अगर कंपनी 45 दिनों में यह भुगतान नहीं करती है, तो उन्हें आदेश की तारीख से 7 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा। गौरतलब है कि सरकार के नियमों के मुताबिक, अप्रैल 2023 के बाद बेची गई सभी कारों को E-20 ईंधन के अनुकूल होना अनिवार्य है।

इस फैसले पर मारुति सुजुकी का कहना है कि उनकी कार पूरी तरह से E-20 पेट्रोल के लिए ही डिजाइन की गई थी। कंपनी ने दावा किया है कि इंजन में खराबी पेट्रोल की गुणवत्ता के कारण आई है, न कि कार के मैन्युफैक्चरिंग में कोई कमी है। मारुति ने जिला फोरम के इस फैसले को चुनौती देने और राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील करने का मन बना लिया है।

विवरण जानकारी
कुल रिफंड राशि ₹2,050,494
कार का मॉडल Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus
मानसिक हर्जाना ₹100,000
कानूनी खर्च ₹10,000
अनुपालन समय 45 दिन

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