कैंपस शूज ने आजादी के जश्न के मौके पर अपने ‘कैंपस किड्स’ फुटवियर लाइन के तहत एक बेहद खास पहल की शुरुआत की है। इस कैंपेन का नाम ‘द किड्स कॉन्स्टिट्यूशन’ रखा गया है, जो 18 अगस्त 2026 से चर्चा में है। इस पहल का मुख्य मकसद बच्चों की नजर से आजादी को फिर से परिभाषित करना है, जिसमें ‘खेलने की आजादी’ को सबसे ऊपर रखा गया है।
कैंपस शूज के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर गौरव शर्मा ने इस पहल के बारे में बताते हुए कहा कि बच्चों के लिए आजादी का मतलब केवल मौज-मस्ती नहीं, बल्कि दौड़ना, कूदना, चढ़ना और नई चीजों को एक्सप्लोर करना है। अक्सर बच्चे खेलते हुए गिरते हैं, गंदे होते हैं और फिर से उठकर खेलने लगते हैं। शर्मा के अनुसार, ब्रांड का उद्देश्य माता-पिता को यह समझाना है कि वे बच्चों के विकास के लिए इन जरूरी गतिविधियों को न रोकें और उन्हें खुलकर खेलने का मौका दें।
इस कैंपेन के लिए एक खास सोशल-फर्स्ट फिल्म भी रिलीज की गई है, जिसे यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर देखा जा सकता है। यह फिल्म बच्चों के अधिकारों का एक मजेदार चार्टर पेश करती है। इसमें बच्चों के उन अधिकारों को दिखाया गया है जिन्हें अक्सर माता-पिता रोक देते हैं। जैसे कि बिना डर के पेड़ों पर चढ़ना, कीचड़ भरे गड्ढों में कूदना, चलने के बजाय दौड़ने को प्राथमिकता देना और मंकी बार्स या ऊँची दीवारों पर चढ़कर अपनी आउटडोर एडवेंचर की भूख को शांत करना।
यह कैंपेन माता-पिता की पाबंदियों और बच्चों की खेलने की स्वाभाविक इच्छा के बीच का अंतर दिखाता है। कैंपस शूज की यह कोशिश है कि बच्चों को बिना किसी बंधन के ‘अनस्ट्रक्चर्ड प्ले’ यानी खुलकर खेलने का पूरा अधिकार मिले। यह पहल न केवल बच्चों के शारीरिक विकास के लिए जरूरी है, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी ज्यादा निडर और स्वतंत्र बनाने में मदद करती है। कंपनी का मानना है कि बच्चों को बचपन का असली अनुभव तभी मिलेगा जब उन्हें अपनी शर्तों पर खेलने की पूरी छूट होगी।



