EV खरीदने की सोच रहे हैं? सावधान! बैटरी और चार्जिंग की ये समस्याएं बन सकती हैं बाधा

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का भविष्य रोमांचक तो है, लेकिन ग्राहकों के मन में कई बड़े सवाल भी हैं। Bain & Company की हालिया 'ग्लोबल ऑटोमोटिव कंज्यूमर सर्वे 2026' रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ग्राहक इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले बैटरी की मजबूती और चार्जिंग की सुविधा को लेकर काफी डरे हुए हैं।
बैटरी और चार्जिंग: ग्राहकों की सबसे बड़ी चिंता
सर्वे में शामिल लोगों ने स्पष्ट किया है कि वे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से क्यों कतरा रहे हैं। यहाँ मुख्य कारण दिए गए हैं जो ग्राहकों को परेशान कर रहे हैं:
- बैटरी की विश्वसनीयता: लगभग 52% संशयवादी ग्राहकों का मानना है कि बैटरी की लाइफ और उसकी मजबूती एक बड़ी समस्या है।
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: 44% लोगों ने कहा कि देश में पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन नहीं हैं।
- लंबा चार्जिंग समय: 43% ग्राहकों के लिए बैटरी को चार्ज करने में लगने वाला अधिक समय एक बड़ी बाधा है।
- कीमत और रेंज: 32% लोग वाहनों की ऊंची कीमत और 31% लोग कम ड्राइविंग रेंज (Range Anxiety) को लेकर चिंतित हैं।
क्या सिर्फ इच्छा होने से कार बिक जाएगी?
रिपोर्ट एक दिलचस्प विरोधाभास की ओर इशारा करती है। जहाँ 57% भारतीय उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए तैयार दिख रहे हैं (विशेषकर 'जेनरेशन Y', जिसमें यह आंकड़ा 61% है), वहीं Bain & Company ने चेतावनी दी है कि केवल इच्छा होने से बिक्री नहीं बढ़ेगी। जब तक बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं होता, तब तक यह केवल कागजी इरादा बना रहेगा।
"भारत एक मूल्य-संवेदनशील (price-sensitive) बाजार है, लेकिन अब लोग केवल ब्रांड नहीं, बल्कि फाइनेंसिंग, तकनीक और एडवांस फीचर्स को देखकर निर्णय ले रहे हैं," Bain & Co के पार्टनर राहुल मिश्रा ने इस पर प्रकाश डाला।
भारत में चार्जिंग स्टेशन का मौजूदा हाल
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार PM E-DRIVE जैसी योजनाओं के जरिए 109 बिलियन रुपये का निवेश कर रही है। हालांकि, जमीनी हकीकत अभी भी चुनौतीपूर्ण है:
- मार्च 2026 तक भारत में लगभग 27,700 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध थे।
- भारत में वर्तमान चार्जर-टू-EV अनुपात 1:235 है, जो वैश्विक मानक (1:6 से 1:20) की तुलना में बहुत पीछे है।
- मौजूदा EV मालिकों में से 71% लोग घर पर चार्जिंग की सुविधा पर निर्भर हैं।
भविष्य की राह: क्या 10% का लक्ष्य होगा पूरा?
सितंबर 2026 तक, भारत में कुल यात्री वाहनों के पंजीकरण में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी लगभग 8.3% रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए मॉडल्स की वैरायटी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से सुधार होता है, तो इस साल के अंत तक EV की पैठ 10% के आंकड़े को पार कर सकती है।
सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय में हालिया प्रशासनिक बदलावों और घरेलू विनिर्माण (Domestic Manufacturing) पर जोर देने से आने वाले समय में ऑटोमोटिव टेस्टिंग और नीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।