BS VII emission norms: 2029 से बदल जाएगी आपकी गाड़ी, बढ़ सकती है कीमत!

भारत में प्रदूषण को कम करने और हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने BS VII emission norms को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस नए नियम के आने से वाहनों के मानक पूरी तरह बदल जाएंगे और इनका सीधा असर आपकी जेब पर भी पड़ सकता है।
कब से लागू होंगे नए नियम?
प्रस्ताव के अनुसार, नए BS VII मानक 1 अप्रैल, 2029 से लागू किए जा सकते हैं। सरकार ने इस बदलाव को चरणों में बांटने की योजना बनाई है:
- यात्री वाहन (Passenger Vehicles): सबसे पहले 2029 से लागू होंगे।
- हल्के वाणिज्यिक वाहन (LCV): इनके लिए 2030 का लक्ष्य रखा गया है।
- भारी वाहन (Heavy Duty Vehicles): इनके लिए 2031 से नियम लागू होंगे।
इस पूरी प्रक्रिया के 2035 तक पूरा होने की उम्मीद है। वर्तमान में भारत में BS VI मानक लागू हैं, जो 2020 से प्रभावी हैं।
क्या होगा खास? सिर्फ धुआं ही नहीं, अब टायर और ब्रेक पर भी नजर
BS VII मानक केवल टेलपाइप उत्सर्जन (धुआं) तक सीमित नहीं रहेंगे। इस बार सरकार ने वास्तविक दुनिया की ड्राइविंग स्थितियों (Real-world driving tests) को भी शामिल किया है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. नए परीक्षण मानक
अब केवल इंजन से निकलने वाला धुआं ही नहीं, बल्कि ब्रेक से निकलने वाले कणों (Brake particle emissions) और टायर के घिसने से होने वाले प्रदूषण (Tyre abrasion) पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
2. इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए सख्त नियम
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए बैटरी की मजबूती (Battery durability) एक बड़ा मुद्दा होगी। नए नियमों के तहत, निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि 5 साल या 1,00,000 किलोमीटर के उपयोग के बाद भी बैटरी की क्षमता अपनी मूल क्षमता के 75 प्रतिशत से कम न हो।
3. ऑनबोर्ड मॉनिटरिंग
वाहनों की सेहत पर नजर रखने के लिए अब 'ऑनबोर्ड मॉनिटरिंग' सिस्टम का उपयोग किया जाएगा, जिससे वाहन की कार्यक्षमता का सटीक पता चल सके।
क्या बढ़ेगी गाड़ियों की कीमत?
इस नए बदलाव से ऑटोमोबाइल उद्योग में हलचल मच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कड़े मानकों को पूरा करने के लिए कंपनियों को अपनी तकनीक में बड़ा बदलाव करना होगा। इससे दो बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं:
- लागत में वृद्धि: नई तकनीक अपनाने के कारण वाहनों की रिटेल कीमत बढ़ सकती है।
- संसाधनों का बंटवारा: कंपनियों को अपने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) विकास कार्यक्रमों से ध्यान हटाकर इन नए नियमों पर ध्यान देना पड़ सकता है।
हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि जो कंपनियां इन मानकों को जल्दी अपना लेंगी, उन्हें वैश्विक बाजार में निर्यात करने में काफी फायदा मिलेगा। फिलहाल, सरकार ने इस मसौदे पर जनता और हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं।