दिल्ली की EV पॉलिसी बने पूरे देश का मॉडल, Euler Motors CEO ने उठाई मांग

Lakhan Sharma5 October 20262 min read0 viewsnews
दिल्ली की EV पॉलिसी बने पूरे देश का मॉडल, Euler Motors CEO ने उठाई मांग

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के भविष्य को लेकर एक बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। Euler Motors के फाउंडर और CEO सौरव कुमार ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा है कि यदि भारत को कमर्शियल वाहनों को तेजी से इलेक्ट्रिक बनाना है, तो सभी राज्य सरकारों को दिल्ली की व्यापक इलेक्ट्रिक वाहन नीति को अपनाना चाहिए।

दिल्ली की EV पॉलिसी: क्यों है यह खास?

दिल्ली सरकार की 'EV पॉलिसी 2026' का लक्ष्य शहर के कुल वाहनों में से कम से कम 30% को इलेक्ट्रिक बनाना है। यह नीति 1 जुलाई, 2026 से लागू हो चुकी है और 31 मार्च, 2030 तक प्रभावी रहेगी। सौरव कुमार का मानना है कि इस तरह की नीतियों से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आने वाली बड़ी बाधाएं जैसे हाई कैपिटल कॉस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को भी दूर किया जा सकेगा।

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बड़े बदलाव और सख्त नियम

दिल्ली सरकार ने आने वाले समय के लिए कुछ कड़े फैसले लिए हैं जो ऑटोमोबाइल सेक्टर की तस्वीर बदल देंगे:

  • 1 जनवरी, 2027 से: नए पेट्रोल, डीजल और CNG ऑटो-रिक्शा और 3.5 टन तक के मालवाहक वाहनों (N1 श्रेणी) के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी जाएगी।
  • 1 अप्रैल, 2028 से: सभी नए टू-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ही अनिवार्य होगा।

सब्सिडी और ग्राहकों को मिलने वाले फायदे

सरकार ने इस बदलाव को आसान बनाने के लिए भारी वित्तीय प्रोत्साहन (Incentives) की घोषणा की है, जिससे ग्राहकों की जेब पर बोझ कम होगा:

  1. N1 इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहन: पहले साल ₹1 लाख की खरीद प्रोत्साहन राशि मिलेगी, जो दूसरे साल घटकर ₹75,000 रह जाएगी।
  2. टू-व्हीलर: इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए ₹30,000 तक की सब्सिडी।
  3. ऑटो-रिक्शा: इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा खरीदने पर ₹50,000 की सब्सिडी।
  4. इलेक्ट्रिक कारें: ₹30 लाख (एक्स-शोरूम) तक की इलेक्ट्रिक कारों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश

सिर्फ सब्सिडी ही नहीं, बल्कि सरकार इस बदलाव के लिए बुनियादी ढांचे पर भी करोड़ों खर्च कर रही है। परिवहन प्रणाली को बदलने के लिए लगभग ₹7,000 करोड़ और EV इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए ₹15,000 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इसी कड़ी में, चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क को मजबूत करने के लिए हाल ही में 382 नए चार्जिंग स्टेशन मंजूर किए गए हैं।

यदि अन्य राज्य भी दिल्ली के इस मॉडल को अपनाते हैं, तो भारत में कमर्शियल और पर्सनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की रफ्तार कई गुना बढ़ सकती है।

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