त्योहारों की तारीख बदली तो ऑटो रिटेल सेल्स गिरी, पर EV टू-व्हीलर्स ने मारी बाजी!

त्योहारों के समय में बदलाव के कारण अक्टूबर में ऑटो रिटेल सेल्स में गिरावट आई है, लेकिन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की मांग में जबरदस्त बढ़त देखी गई है।

Lakhan Sharma3 November 20262 min read0 viewsnews

भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए अक्टूबर का महीना मिला-जुला रहा। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फेस्टिव कैलेंडर (त्योहारों के समय) में आए बदलाव के कारण रिटेल सेल्स में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, यह गिरावट ग्राहकों की मांग में कमी के कारण नहीं, बल्कि त्योहारों के समय में हुए बदलाव की वजह से हुई है। दिलचस्प बात यह है कि जहां पारंपरिक गाड़ियां सुस्त रहीं, वहीं इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स ने बाजार में जबरदस्त धमाका किया है।

पैसेंजर व्हीकल और टू-व्हीलर: थोक बिक्री बढ़ी, रिटेल में सुस्ती

रिपोर्ट बताती है कि अक्टूबर 2026 में घरेलू पैसेंजर व्हीकल (PV) की थोक बिक्री (Wholesale) में साल दर साल 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। डीलर्स द्वारा स्टॉक भरने और मजबूत मांग के कारण यह बढ़त देखी गई। लेकिन जब रिटेल सेल्स की बात आई, तो फेस्टिव कैलेंडर मिसमैच के कारण अक्टूबर में रिटेल वॉल्यूम में 14% की गिरावट दर्ज की गई।

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टू-व्हीलर सेगमेंट में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा:

  • थोक बिक्री: टू-व्हीलर की थोक बिक्री में 15% से ज्यादा की सालाना बढ़त हुई।
  • ICE टू-व्हीलर्स: पेट्रोल इंजन वाली दोपहिया गाड़ियों की रिटेल बिक्री में 32% की भारी गिरावट आई।
  • EV टू-व्हीलर्स: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स ने सबको चौंकाते हुए रिटेल सेल्स में 48% की शानदार बढ़त दर्ज की।

कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में मजबूती

कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में मांग काफी स्थिर बनी हुई है। विशेष रूप से मीडियम और हैवी कमर्शियल व्हीकल (M&HCV) की थोक बिक्री में 15% से अधिक की वृद्धि हुई है। गुड्स कमर्शियल व्हीकल की रिटेल बिक्री में भी 1% की मामूली बढ़त देखी गई, जिसमें बस और भारी मालवाहक वाहनों की भूमिका अहम रही। वहीं, VE कमर्शियल व्हीकल (VECV) ने भी इस महीने 35% की मजबूत वृद्धि दर्ज की है।

ट्रैक्टर की बिक्री में गिरावट के कारण

जहां एक तरफ कमर्शियल गाड़ियां अच्छा कर रही हैं, वहीं ट्रैक्टर की बिक्री में 10% से अधिक की गिरावट आई है। इसके पीछे कई मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:

  1. खरीफ की बुवाई में कमी आना।
  2. त्योहारी सीजन का नवंबर की ओर खिसक जाना।
  3. पिछले साल के मुकाबले उच्च आधार (Higher Base) का होना।

विशेष नोट: ऑटोमोबाइल निर्माताओं (OEMs) ने भविष्य की मांग को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। खराब मानसून और उत्पादन लागत में बढ़ोत्तरी जैसे कारक आने वाले समय में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

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