E20 से आगे की तैयारी अब भारत में फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों के लिए तैयार हुआ धांसू रोडमैप

भारत में अब पेट्रोल की निर्भरता को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। 4 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'AIDA ग्रीन एनर्जी सेमिनार' के दौरान ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) और IIT दिल्ली ने मिलकर एक खास पॉलिसी रोडमैप जारी किया है। इसका नाम 'फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFV): इनेबलिंग एनर्जी सिक्योरिटी एंड सस्टेनेबल मोबिलिटी इन इंडिया' रखा गया है। इस दौरान ऑटोमोबाइल कंपनियों, नीति निर्माताओं और फ्यूल एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया ताकि E20 से आगे की तकनीक पर चर्चा हो सके।
क्या है ये 10-पॉइंट रोडमैपइस नई रिपोर्ट में 10-पॉइंट वाला एक पॉलिसी रोडमैप पेश किया गया है। अब सरकार का फोकस सिर्फ इथेनॉल बनाने की क्षमता बढ़ाने पर नहीं, बल्कि ऐसी गाड़ियां तैयार करने पर है जो ज्यादा इथेनॉल ब्लेंड पर चल सकें। इसमें गाड़ियों की टेक्नोलॉजी, फ्यूल की कीमत, चार्जिंग या फिलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्राहकों की पसंद जैसी जरूरी चीजों पर जोर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए गेम-चेंजर साबित होंगी और इससे कच्चे तेल के आयात का खर्च भी घटेगा।
खेती और बायोएनर्जी का तालमेलइस सेमिनार में CRID इंडिया ने भी एक स्टडी जारी की है, जो यह बताती है कि बायोफ्यूल के लिए खेती और पानी का इस्तेमाल कैसे संतुलित रखा जाए। रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 के दौरान इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल की गई जमीन भारत के कुल कृषि क्षेत्र का मात्र 1.58% हिस्सा थी। इसका मतलब है कि इथेनॉल के लिए जमीन की कमी नहीं है और इसे सस्टेनेबल तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| पहल | फ्लेक्स-फ्यूल रोडमैप (E20 से आगे) |
| मुख्य संस्थाएं | AIDA और IIT दिल्ली |
| उद्देश्य | एनर्जी सिक्योरिटी और सस्टेनेबल मोबिलिटी |
| प्रमुख फोकस | गाड़ी तकनीक, फ्यूल प्राइस और इंफ्रास्ट्रक्चर |
| भूमि उपयोग | कुल कृषि क्षेत्र का केवल 1.58% |