पुरानी डीजल गाड़ियों का प्रदूषण अब 90 फीसदी तक होगा कम IIT दिल्ली की धांसू तकनीक आई काम

Lakhan Sharma5 September 20262 min read0 viewsnews
पुरानी डीजल गाड़ियों का प्रदूषण अब 90 फीसदी तक होगा कम IIT दिल्ली की धांसू तकनीक आई काम

अगर आपके पास पुरानी डीजल ट्रक या बस है तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। केंद्र सरकार ने पुरानी डीजल गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण को कम करने के लिए एक बेहद खास तकनीक को मंजूरी दे दी है। इस तकनीक को आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के विशेषज्ञों ने तैयार किया है, जिसे 'रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस' यानी RECD कहा जा रहा है।

क्या है यह नई तकनीक

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान इस नई तकनीक की जानकारी दी। यह डिवाइस पुरानी डीजल गाड़ियों के इंजन में फिट किया जाएगा, जिससे गाड़ियों से निकलने वाला हानिकारक पार्टिकुलेट मैटर (PM) 90 फीसदी तक कम हो जाएगा। इसके अलावा, यह नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) उत्सर्जन को भी करीब 60 फीसदी तक घटाने में सक्षम है।

किन गाड़ियों में होगा फिट

सरकार ने इसे खास तौर पर BS-III और BS-IV मानकों वाली पुरानी डीजल गाड़ियों के लिए मंजूरी दी है। यह तकनीक पहले से ही डीजल जनरेटर सेट में इस्तेमाल की जा रही है और वहां यह बेहद सफल रही है। अब इसे सड़क पर दौड़ने वाले बड़े वाहनों के लिए लागू किया जा रहा है। सड़क परिवहन मंत्रालय जल्द ही इसके लिए जरूरी नियम और तकनीकी मानक (AIS-228) फाइनल करने जा रहा है।

कितना आएगा खर्च

इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत इसकी किफायती कीमत है। एक अनुमान के मुताबिक, एक यूनिट की कीमत करीब 4,000 से 5,000 रुपये के बीच हो सकती है। उन वाहन मालिकों के लिए यह एक बहुत ही सस्ता और शानदार विकल्प है जो अभी अपनी गाड़ी को स्क्रैप यानी कबाड़ में नहीं भेजना चाहते। इस डिवाइस को लगवाने के बाद पुरानी गाड़ियां काफी हद तक आधुनिक BS-VI मानकों के बराबर प्रदूषण कम करने में सक्षम हो जाएंगी।

विवरणजानकारी
तकनीक का नामRECD (Retrofit Emission Control Device)
विकसित कियाIIT दिल्ली
प्रदूषण में कमी90% तक पार्टिकुलेट मैटर कम
NOx में कमी60% तक
अनुमानित कीमत4,000 से 5,000 रुपये
उपयोगBS-III और BS-IV डीजल इंजन
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