सितंबर में ऑटो सेल्स में भारी उछाल, लेकिन ट्रैक्टरों की रफ्तार थमी!

भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए सितंबर का महीना मिला-जुला रहा है। जेफरीज (Jefferies) की एक ताजा रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, जहां एक तरफ यात्री वाहनों (Passenger Vehicles), दोपहिया वाहनों और कमर्शियल वाहनों की बिक्री में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर ट्रैक्टरों की मांग में सुस्ती नजर आ रही है।
सेल्स का गणित: कहां कितनी बढ़त?
सितंबर के शुरुआती 25 दिनों के रजिस्ट्रेशन डेटा पर नजर डालें तो बाजार में काफी हलचल दिखाई देती है। रिपोर्ट के मुताबिक:
- पैसेंजर व्हीकल: पिछले साल के मुकाबले 78% की शानदार बढ़त।
- दोपहिया वाहन: रजिस्ट्रेशन में 75% का उछाल।
- भारी कमर्शियल वाहन: ट्रकों की बिक्री में 53% की वृद्धि।
- ट्रैक्टर: इस सेगमेंट में केवल 4% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है।
हालांकि, जेफरीज ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस साल की भारी बढ़त का एक कारण पिछले साल का कम आधार (low base) भी है, क्योंकि पिछले साल सितंबर के दौरान कुछ कारणों से बिक्री में देरी हुई थी।
बड़ी कंपनियों के लिए क्या है अनुमान?
जेफरीज ने विभिन्न ऑटो दिग्गजों के लिए सितंबर के थोक वॉल्यूम (Wholesale Volumes) का अनुमान लगाया है, जो इस प्रकार है:
- Ashok Leyland: 27% की वृद्धि के साथ 23,950 यूनिट्स तक पहुंचने की उम्मीद।
- Tata Motors Passenger Vehicles: 25% की बढ़त के साथ 76,000 यूनिट्स का अनुमान।
- Maruti Suzuki: 17% की वृद्धि के साथ 222,500 यूनिट्स का लक्ष्य।
- TVS Motor: 17% की बढ़त के साथ 635,000 यूनिट्स का अनुमान।
- Bajaj Auto: 15% की वृद्धि के साथ 585,000 यूनिट्स।
- Hyundai Motor India: 9% की बढ़त के साथ 77,000 यूनिट्स।
- Hero MotoCorp: इसकी बिक्री में कोई खास बदलाव नहीं, यानी वॉल्यूम लगभग स्थिर रहने की उम्मीद है।
Mahindra & Mahindra: दोतरफा तस्वीर
महिंद्रा एंड महिंद्रा के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। कंपनी के ऑटोमोबाइल वॉल्यूम में 20% की सालाना बढ़त (121,500 यूनिट्स) की उम्मीद है, लेकिन ट्रैक्टर सेगमेंट में कंपनी को चुनौती मिल सकती है। अनुमान है कि ट्रैक्टर वॉल्यूम में 6% की गिरावट आ सकती है, जिससे कंपनी के कुल वॉल्यूम में केवल 10% की वृद्धि होने की संभावना है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि बाजार हिस्सेदारी (Market Share) के मामले में TVS Motor दोपहिया सेगमेंट में मजबूत स्थिति बना रहा है, जबकि Mahindra ने यात्री वाहनों के रजिस्ट्रेशन में अपनी पकड़ मजबूत की है।