भारत यूरोप फ्री ट्रेड डील से सस्ती होंगी गाड़ियां पहले साल एक लाख कारों का कोटा तय

Lakhan Sharma12 September 20264 min read3 viewsCars
भारत यूरोप फ्री ट्रेड डील से सस्ती होंगी गाड़ियां पहले साल एक लाख कारों का कोटा तय

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई फ्री ट्रेड डील के तहत अब हर साल यूरोप से आने वाली पेट्रोल, डीजल और बिना प्लग-इन वाली हाइब्रिड कारों पर कम कस्टम ड्यूटी लगेगी। पहले साल इसके तहत 1 लाख गाड़ियों के आने का कोटा तय किया गया है। यूरोपीय आयोग ने 11 सितंबर को इस समझौते के टेक्स्ट को औपचारिक मंजूरी की प्रक्रिया में रख दिया है। हालांकि, दोनों तरफ से आंतरिक प्रक्रिया पूरी होने और कानूनी समीक्षा के बाद ही यह पूरी तरह लागू होगा। यह पूरी योजना आने वाले समय के लिए एक रोडमैप की तरह है, जिसका मतलब यह नहीं है कि तुरंत ही कार खरीदारों को भारी डिस्काउंट मिलने लगेगा।

कोटा और समय के साथ बढ़ती गाड़ियों की संख्या

द टाइम्स ऑफ इंडिया और द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल और नॉन-प्लग-इन हाइब्रिड पैसेंजर गाड़ियों के लिए पहले साल का कोटा 1 लाख यूनिट तय किया गया है। यह संख्या पांचवें साल तक बढ़कर 1 लाख 30 हजार और दसवें साल तक 1 लाख 60 हजार यूनिट्स हो जाएगी। इन फायदों का लाभ उठाने के लिए गाड़ी की सीआईएफ यानी कॉस्ट, इंश्योरेंस और फ्रेट वैल्यू 15,000 यूरो से ज्यादा होनी जरूरी है।

सस्ता गाड़ी के लिए 👉👉👉Join Channel

टैरिफ स्ट्रक्चर और असेंबली के नियम

जो गाड़ियां 15,000 से 35,000 यूरो के बीच की हैं, उनकी बेसिक कस्टम ड्यूटी पहले साल में 110 परसेंट से घटकर 35 परसेंट हो जाएगी और पांचवें साल तक यह गिरकर 10 परसेंट पर आ जाएगी। वहीं, 35,000 यूरो से महंगी कारों पर ड्यूटी पहले 66 परसेंट से घटकर 30 परसेंट होगी और पांचवें साल में यह भी 10 परसेंट पर पहुंच जाएगी। पांचवां साल शुरू होने पर 50,000 यूरो से ज्यादा महंगी गाड़ियों के लिए खास तौर पर 43,000 यूनिट्स का कोटा रिजर्व रखा जाएगा। कोटे से बाहर आने वाली गाड़ियों पर अलग टैक्स रेट लागू होंगे। इसके अलावा, पूरी तरह से नॉक डाउन यानी सीकेडी गाड़ियों के लिए पांच साल तक हर साल 75,000 यूनिट्स का अलग कोटा रहेगा, जो दसवें साल से घटकर 50,000 यूनिट्स हो जाएगा। सीकेडी किट्स पर लगने वाली इन-कोटा ड्यूटी तीसरे साल तक 16.5 परसेंट से घटकर 8.25 परसेंट पर आ जाएगी।


English Index / विवरण (Details)First Year / शुरुआती नियम (First Year)Future Years / आने वाले साल (Future Years)
ICE & Non-Plug-in Hybrid Car Quota (कार कोटा)100,000 Units (यूनिट्स)160,000 Units by Year 10 (दसवें साल तक)
Duty for Cars 15k-35k Euros (15k-35k यूरो कार ड्यूटी)35 Percent (प्रतिशत)10 Percent by Year 5 (पाँचवें साल तक)
Duty for Cars Above 35k Euros (35k यूरो से ऊपर कार ड्यूटी)30 Percent (प्रतिशत)10 Percent by Year 5 (पाँचवें साल तक)
CKD Kits Quota (सीकेडी किट कोटा)75,000 Units (यूनिट्स)50,000 Units from Year 10 (दसवें साल से)
EV and Plug-in Hybrid Quota (ईवी और प्लग-इन हाइब्रिड कोटा)Starts Year 5: 20,000 Units (पाँचवें साल से शुरू)90,000 Units from Year 14 (चौदहवें साल से)

इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइब्रिड कारों के लिए नियम

बैटरियों से चलने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियां और प्लग-इन हाइब्रिड कारों के लिए यह रास्ता थोड़ा धीमा रखा गया है। इन्हें पांचवें साल से 20,000 यूनिट्स के कोटे के साथ छूट मिलना शुरू होगी। दसवें साल में यह कोटा बढ़कर 50,000 और चौदहवें साल से 90,000 यूनिट्स हो जाएगा। इन कारों के लिए भी सीआईएफ वैल्यू कम से कम 20,000 यूरो होनी जरूरी है। इन मॉडल्स पर लगने वाली इन-कोटा ड्यूटी पांचवें से दसवें साल के बीच 30 परसेंट से घटकर 10 परसेंट हो जाएगी।

मार्केट पर असर और इंडस्ट्री का रुख

अखबारों में छपने वाली ड्यूटी दरों का सीधा मतलब यह नहीं है कि शोरूम की फाइनल कीमतें भी उतनी ही कम हो जाएंगी। बेसिक कस्टम ड्यूटी सिर्फ गाड़ी के देश में आने पर लगती है, जबकि ग्राहक को चुकाई जाने वाली कीमत पर जीएसटी, रजिस्ट्रेशन फीस, इंश्योरेंस, करेंसी के रेट में उतार-चढ़ाव और कंपनियों की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी का भी असर पड़ता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने बताया कि पहले साल का यह कोटा साल 2025 में यूरोप से आयात की गई 17,191 कारों की तुलना में काफी बड़ा है। इससे आयात की मात्रा लगभग छह गुना तक बढ़ सकती है। हालांकि, इसे लागू करने की तारीख साल 2027 तय की गई है, लेकिन इससे पहले यूरोपीय संसद और भारत की आंतरिक प्रक्रियाओं से इसे पास होना बाकी है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की बाजार की अफवाहों की बजाय सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार करें।

Share:

Comments

Leave a comment