भारत और यूरोप मिलकर बनाएंगे AI वाली गाड़ियां, Nasscom ने दिया बड़ा सुझाव

ऑटोमोबाइल की दुनिया अब केवल इंजन और लोहे तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह अब सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का खेल बन चुकी है। इस बदलते दौर में, Nasscom के वाइस चेयरमैन किशोर पाटिल ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने सुझाव दिया है कि भारत और यूरोप को मिलकर अगली पीढ़ी की वाहन तकनीक विकसित करनी चाहिए ताकि वैश्विक बाजार में अपनी धाक जमाई जा सके।
सॉफ्टवेयर और इंजीनियरिंग का अनोखा संगम
जर्मनी के बाडेन-बाडेन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्फ्रेंस (ELIV 2026) में बोलते हुए, किशोर पाटिल ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच का रिश्ता अब केवल 'सप्लायर' तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने एक ऐसी दीर्घकालिक साझेदारी की वकालत की जिसमें दोनों क्षेत्र मिलकर रिसर्च करें, नई तकनीक विकसित करें और बौद्धिक संपदा (IP) का निर्माण करें।
पाटिल के अनुसार, इस साझेदारी में दोनों पक्षों के पास अपनी-अपनी ताकत है:
- यूरोप: ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग में महारत।
- भारत: सॉफ्टवेयर क्षमताएं, AI टैलेंट और बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग संसाधन।
2035 तक बाजार में आएगी बड़ी क्रांति
आने वाले दशक में मोबिलिटी का भविष्य उन इकोसिस्टम्स के पास होगा जो एक-दूसरे की क्षमताओं को जोड़ेंगे। आंकड़ों की बात करें तो यह साझेदारी बेहद मुनाफे वाली साबित हो सकती है। पाटिल द्वारा बताए गए अनुमानों के अनुसार:
- कार बिक्री: 2035 तक भारत और यूरोप मिलकर दुनिया की कुल कार बिक्री का लगभग एक-चौथाई हिस्सा (करीब 23.1 मिलियन नई कारें) संभाल सकते हैं।
- निर्यात: दोनों क्षेत्रों का संयुक्त वाहन निर्यात 7.5 मिलियन यूनिट से अधिक होने की संभावना है।
AI-परिभाषित वाहनों का युग आ रहा है
अब हम 'सॉफ्टवेयर-परिभाषित' (Software-defined) वाहनों से निकलकर 'AI-परिभाषित' (AI-defined) वाहनों के युग में प्रवेश कर रहे हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में कारों का डिजाइन, सॉफ्टवेयर विकास, टेस्टिंग और वैलिडेशन—सब कुछ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए होगा।
भविष्य के सहयोग के लिए कुछ प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनमें शामिल हैं:
- सेमीकंडक्टर और बैटरी तकनीक
- साइबर सुरक्षा (Cybersecurity)
- ऑटोमोटिव AI और फैक्ट्री रोबोटिक्स
- स्वायत्त गतिशीलता (Autonomous Mobility)
यह साझेदारी न केवल नई तकनीकों के द्वार खोलेगी, बल्कि वैश्विक ऑटोमोटिव मार्केट में भारत और यूरोप की स्थिति को भी और अधिक मजबूत बनाएगी।