भारत में SUVs का दबदबा: कुल बिक्री में 70% हिस्सेदारी, बढ़ती मांग से बाजार में उछाल

Lakhan Sharma19 October 20262 min read0 viewsnews
भारत में SUVs का दबदबा: कुल बिक्री में 70% हिस्सेदारी, बढ़ती मांग से बाजार में उछाल

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इस समय SUV (Utility Vehicles) का जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। JM Financial की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में बिकने वाले हर 10 पैसेंजर वाहनों में से लगभग 7 वाहन अब Utility Vehicles हैं। इस सेगमेंट ने भारतीय बाजार की रफ्तार को नई ऊंचाइयां दी हैं और कुल पैसेंजर वाहन बिक्री में अपनी हिस्सेदारी को काफी बढ़ा लिया है।

SUV सेगमेंट ने बढ़ाई बाजार की रफ्तार

रिपोर्ट के मुताबिक, पैसेंजर वाहन (PV) बाजार में शानदार बढ़त देखी जा रही है। सितंबर 2026 में घरेलू पैसेंजर वाहनों की बिक्री में साल-दर-साल (YoY) 22% की वृद्धि दर्ज की गई। इस बढ़त में सबसे बड़ा योगदान Utility Vehicles का रहा है, जिन्होंने अकेले सितंबर में 26% की मजबूत ग्रोथ दिखाई है।

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इस सेगमेंट की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:

  • सितंबर 2026 में Utility Vehicles की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 69% हो गई है।
  • पिछले साल (सितंबर 2025) में यह हिस्सेदारी लगभग 67% थी।
  • अप्रैल-सितंबर 2026 की अवधि के दौरान पैसेंजर वाहनों में 28% की कुल वृद्धि हुई है।

कारों और दोपहिया वाहनों का हाल

जहाँ SUV सेगमेंट रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर रहा है, वहीं सामान्य कारों की बिक्री में 14% की वृद्धि देखी गई है। दोपहिया वाहनों के मामले में भी मांग में बदलाव देखा जा रहा है:

  • स्कूटर्स की मांग मोटरसाइकिलों के मुकाबले अधिक है, जिसमें 19% की बढ़त देखी गई है।
  • मोटरसाइकिलों में 150cc से अधिक क्षमता वाले मॉडल विकास को गति दे रहे हैं।
  • एंट्री-लेवल मोटरसाइकिलों की मांग पर बढ़ती कीमतों का असर पड़ रहा है।

कमर्शियल वाहन और भविष्य की चुनौतियां

सिर्फ पैसेंजर वाहन ही नहीं, बल्कि कमर्शियल वाहन सेगमेंट में भी मजबूती देखी गई है। दूसरी तिमाही में कमर्शियल वाहनों की बिक्री में 29% का उछाल आया है। हालांकि, रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है:

"पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण इनपुट लागत (Input Costs) बढ़ रही है, जो ऑटो कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकती है।"

विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारी सीजन के दौरान मांग बहुत मजबूत रहने वाली है, जिससे चौथी तिमाही में कंपनियों को बेहतर डिलीवरी और डिस्पैच देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, आने वाले समय में विकास दर में कुछ स्थिरता (moderate growth) आने की भी संभावना है।

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