त्योहारी सीजन में रिकॉर्ड तोड़ बिक्री! हीरो मोटोकॉर्प ने जताया बड़ा भरोसा

भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए आने वाला समय बेहद शानदार हो सकता है। हीरो मोटोकॉर्प के कार्यकारी निदेशक, विक्रम कसबेककर ने संकेत दिया है कि त्योहारी सीजन के दौरान पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों तरह के वाहनों की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। इस बढ़ती मांग के कारण यह साल भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए अब तक का सबसे सफल और रिकॉर्ड बनाने वाला साल साबित हो सकता है।
डिमांड और सप्लाई का खेल: अब बढ़ेगी मैन्युफैक्चरिंग
मुंबई में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान कसबेककर ने बताया कि वर्तमान में बाजार की स्थिति काफी दिलचस्प है। उन्होंने कहा कि इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) दोनों ही सेगमेंट में मांग, सप्लाई से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
मुख्य बातें:
- मांग इतनी अधिक है कि मैन्युफैक्चरर्स के लिए उत्पादन बढ़ाना एक बड़ा अवसर है।
- लंबे समय के बाद इंडस्ट्री को अपनी पूरी क्षमता से बाजार की जरूरतों को पूरा करने का मौका मिला है।
- पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों ही वाहनों के सेगमेंट में ग्राहकों का उत्साह बढ़ा हुआ है।
ग्लोबल चुनौतियों और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों पर नजर
दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे माल (Commodity) की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर जब सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी इन चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि कीमतों में बदलाव एक चिंता का विषय है, लेकिन अब तक हीरो मोटोकॉर्प को किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा है।
इसके साथ ही, कंपनी अपने इलेक्ट्रिक वाहन ब्रांड VIDA के जरिए ईवी बिजनेस का विस्तार करने पर भी तेजी से काम कर रही है।
सेमीकंडक्टर और भविष्य की तकनीक: AI का असर
वाहनों में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर और माइक्रोकंट्रोलर की उपलब्धता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कंपनियां अपनी जरूरतों के हिसाब से सोर्सिंग रणनीति बना रही हैं। उन्होंने यह भी नोट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण सेमीकंडक्टर की वैश्विक मांग में भी बदलाव आ रहा है।
आत्मनिर्भर भारत और R&D पर जोर
कसबेककर ने भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को सलाह दी कि उन्हें आयात पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
- R&D में निवेश: रिसर्च और डेवलपमेंट पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
- स्वदेशी तकनीक: कंपनियों को अपना खुद का इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) और तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करनी चाहिए।
- ग्लोबल स्टैंडर्ड: लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए वैश्विक मानकों को अपनाना अनिवार्य है।
अंत में, उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में आने वाले युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए हमेशा कुछ नया सीखते रहना चाहिए और कभी भी अपने 'कम्फर्ट जोन' में नहीं फंसना चाहिए।