JSW और Volkswagen की नई पार्टनरशिप से भारतीय बाजार में मचेगी हलचल

Lakhan Sharma9 September 20262 min read2 viewsnews
JSW और Volkswagen की नई पार्टनरशिप से भारतीय बाजार में मचेगी हलचल

भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बहुत बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। जेएसडब्ल्यू (JSW) ग्रुप और फोक्सवैगन (Volkswagen) ग्रुप ने एक साथ आने की दिशा में हाथ मिलाया है। इन दोनों दिग्गज कंपनियों ने स्कोडा ऑटो फोक्सवैगन इंडिया के लिए 51:49 की हिस्सेदारी वाली जॉइंट वेंचर बनाने की बातचीत शुरू कर दी है। अभी यह एक नॉन-बाइंडिंग समझौता है, जिसका मतलब है कि दोनों कंपनियां अभी बातचीत के शुरुआती दौर में हैं और 2026 के अंत तक इसे फाइनल करने की कोशिश की जाएगी।

क्या है इस डील का मकसद

इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत के कॉम्पिटिटिव मार्केट में अपनी पकड़ को और मजबूत करना है। फोक्सवैगन पिछले दो दशकों से भारत में गाड़ियां बना और निर्यात कर रही है। अब जेएसडब्ल्यू के साथ मिलकर कंपनी अपने प्रोडक्ट्स की रेंज को बढ़ाना चाहती है और लोकल लेवल पर मैन्युफैक्चरिंग को और गहरा करना चाहती है। यह नया वेंचर जेएसडब्ल्यू की मौजूदा एमजी मोटर इंडिया पार्टनरशिप से पूरी तरह अलग रहेगा।

मैन्युफैक्चरिंग और क्षमता का गणित

फोक्सवैगन के पास चाकन और छत्रपति संभाजीनगर में बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जिनकी कुल सालाना क्षमता 3,15,000 गाड़ियां बनाने की है। साल 2025 तक कंपनी ने भारत में 20 लाख गाड़ियां बनाने का आंकड़ा पार कर लिया है और 40 से ज्यादा देशों में 7.25 लाख से ज्यादा गाड़ियां एक्सपोर्ट भी की हैं।

कस्टम ड्यूटी का पुराना विवाद

इस डील के सामने एक बड़ी चुनौती कस्टम ड्यूटी से जुड़ा विवाद भी है। औरंगाबाद प्लांट में 2012 से 2024 के बीच हुए पार्ट्स इंपोर्ट को लेकर अधिकारियों ने करीब 11,526 करोड़ रुपये का नोटिस भेजा है। आरोप है कि पार्ट्स को गलत तरीके से डिक्लेयर किया गया था। हालांकि, फोक्सवैगन इन आरोपों को नकारती आई है और मामला अभी बॉम्बे हाई कोर्ट में है। जानकारों का मानना है कि इस पूरे विवाद का असर करीब 20,000 करोड़ रुपये तक हो सकता है, जिसे लेकर अभी कोई फाइनल फैसला नहीं आया है।

आगे की राह

फिलहाल दोनों कंपनियां फाइनेंस, कानून और टैक्स से जुड़ी जांच-पड़ताल कर रही हैं। इस डील में सबसे अहम सवाल यह है कि जेएसडब्ल्यू इस हिस्सेदारी के लिए कितनी कीमत चुकाएगी और पुराने कस्टम विवाद की जिम्मेदारी कौन लेगा। अगर सब कुछ सही रहा, तो 2026 के अंत तक यह एक पक्का एग्रीमेंट बन सकता है, जो भारतीय सड़कों पर नई गाड़ियों की एक बड़ी रेंज ला सकता है।

DetailsInformation
Proposed Ownership51:49 (JSW:Volkswagen)
Manufacturing Capacity3,15,000 units annually
Target DateEnd of 2026
Disputed AmountApprox 11,526 Crore INR
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