MAHLE ne Coimbatore mein shuru kiya desh ka pehla electric compressor plant

German ऑटोमोटिव दिग्गज MAHLE ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने कोयंबटूर में अपनी फैक्ट्री में भारत की पहली इलेक्ट्रिक कंप्रेसर प्रोडक्शन लाइन शुरू कर दी है। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी ने 7 मिलियन यूरो यानी करीब 65 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह कदम देश में ईवी के लिए जरूरी थर्मल मैनेजमेंट पार्ट्स की कमी को दूर करने में मदद करेगा।
इलेक्ट्रिक कंप्रेसर क्यों है जरूरीइलेक्ट्रिक कारों में बैटरी का तापमान सही रखना बहुत जरूरी होता है। यह कंप्रेसर रेफ्रिजरेंट को घुमाकर बैटरी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य हाई-वोल्टेज पार्ट्स को ठंडा रखता है। अगर बैटरी का तापमान सही न हो, तो कार की रेंज कम हो सकती है और चार्जिंग की स्पीड पर भी असर पड़ता है। यह कंप्रेसर बिना इंजन की मदद के सीधे बिजली से चलता है, जो ईवी की परफॉरमेंस को बेहतर बनाता है।
प्रोडक्शन और सप्लाई चेन पर असरMAHLE की इस नई लाइन की सालाना क्षमता 3 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक कंप्रेसर बनाने की है। कंपनी का कहना है कि जैसे-जैसे बाजार में मांग बढ़ेगी, वे प्रोडक्शन को उसी हिसाब से बढ़ाएंगे। कोयंबटूर प्लांट पहले से ही टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए स्टार्टर मोटर्स, अल्टरनेटर और ट्रैक्शन मोटर्स बना रहा है। स्थानीय स्तर पर प्रोडक्शन होने से कार कंपनियों को पार्ट्स मंगाने में कम समय लगेगा और वे भारत की सड़क स्थितियों के हिसाब से बेहतर काम कर पाएंगी।
ईवी मालिकों के लिए जरूरी सलाहअगर आपकी इलेक्ट्रिक कार की कूलिंग कमजोर हो गई है, कंप्रेसर से अजीब आवाज आ रही है, या डैशबोर्ड पर बार-बार थर्मल वॉर्निंग दिख रही है, तो तुरंत ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर जाएं। ईवी के इन पार्ट्स के साथ कभी भी छेड़छाड़ न करें और न ही लोकल मैकेनिक से कोई भी पार्ट्स बदलवाएं। हमेशा हाई-वोल्टेज सिस्टम के जानकार तकनीशियनों से ही अपनी कार की जांच कराएं।
| विवरण (Details) | जानकारी (Information) |
|---|---|
| निवेश (Investment) | 7 मिलियन यूरो |
| वार्षिक क्षमता | 3,00,000+ यूनिट्स |
| मुख्य केंद्र | कोयंबटूर, भारत |
| कार्यबल लक्ष्य (2027) | 75% महिला कर्मचारी |