Electric बस और ट्रक बनाने वाली कंपनियों के लिए सरकार ने बदले नियम अब भारत में ही बनेगा सब कुछ

भारत में इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों के लिए सरकारी नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। 1 सितंबर 2026 से पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों में इस्तेमाल होने वाली ट्रैक्शन मोटर्स के लिए लोकलाइजेशन के नियम अनिवार्य कर दिए गए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अब इन गाड़ियों में लगने वाले मुख्य पार्ट्स को बाहर से मंगाने के बजाय भारत में ही बनाना या असेंबल करना होगा।
क्या बदलेगा मैन्युफैक्चरिंग मेंभारी उद्योग मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अब इलेक्ट्रिक बस और ट्रक बनाने वाली सभी कंपनियों को इन सख्त नियमों का पालन करना होगा। नियमों के मुताबिक, रोटर और स्टेटर की असेंबली, चुंबक (मैग्नेट) का एकीकरण और शाफ्ट लगाने जैसे महत्वपूर्ण काम अब देश के भीतर ही होने चाहिए। अगर कंपनियां ऐसा नहीं करती हैं, तो उन्हें सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी और अन्य लाभ नहीं मिलेंगे।
सरकार का क्या है मकसदकेंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा है कि सरकार का मुख्य ध्यान अब केवल गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने पर नहीं है, बल्कि देश में ही तकनीक को विकसित करने पर है। सरकार भारत को ग्रीन मोबिलिटी टेक्नोलॉजी का ग्लोबल हब बनाना चाहती है। हालांकि, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने कुछ जरूरी पार्ट्स की कमी का हवाला देते हुए समय सीमा को अप्रैल 2027 तक बढ़ाने की अपील की थी, लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना और तय समय पर नियम लागू कर दिए।
पुराने वाहनों को हटाने की तैयारीइलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने भी 'परिवर्तन' स्कीम शुरू की है। इसके तहत पुराने BS-3 और BS-4 कमर्शियल वाहनों को हटाकर उनकी जगह इलेक्ट्रिक या CNG गाड़ियां लाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार इसके बदले में मालिकों को टैक्स में छूट और रजिस्ट्रेशन फीस में कमी जैसे कई आर्थिक फायदे भी दे रही है। यह पूरी कवायद मार्च 2028 तक जारी रहने वाली पीएम ई-ड्राइव स्कीम का हिस्सा है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| नियम लागू होने की तिथि | 1 सितंबर 2026 |
| प्रभावित वाहन | इलेक्ट्रिक बस और ट्रक |
| अनिवार्य कार्य | ट्रैक्शन मोटर का घरेलू असेंबली |
| स्कीम का नाम | पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) |
| लक्ष्य | आत्मनिर्भर भारत और ग्रीन मोबिलिटी |