जब्त गाड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अब पुलिस थानों में सड़ने से बचेंगी आपकी गाड़ियां

सुप्रीम कोर्ट ने देश के लाखों वाहन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि पुलिस द्वारा जब्त की गई गाड़ियों को आपराधिक ट्रायल के दौरान लंबे समय तक थानों या पुलिस कंपाउंड में खड़ा नहीं रखा जा सकता। अक्सर देखा गया है कि कानूनी पेचीदगियों के कारण गाड़ियां सालों तक बाहर खड़ी रहती हैं, जिससे वे कबाड़ में बदल जाती हैं।
जस्टिस ने बताया क्यों जरूरी है गाड़ियों की वापसीजस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि व्यावसायिक गाड़ियां अगर लंबे समय तक खड़ी रहती हैं, तो उनकी वैल्यू बहुत कम हो जाती है। मौसम की मार, जंग और कलपुर्जों के खराब होने से मालिक को दोहरा नुकसान होता है। कोर्ट ने माना कि गाड़ी खड़ी रहने का मतलब है मालिक की कमाई का जरिया बंद होना, जो आर्थिक रूप से गलत है।
क्या था गुजरात का ट्रक मामलायह फैसला एक अशोक लीलैंड ट्रक (RJ-14-GQ-22692) से जुड़े मामले में आया है। इस ट्रक को जनवरी 2025 में गुजरात पुलिस ने अवैध शराब ले जाने के आरोप में जब्त किया था। ट्रक के मालिक ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए अपनी गाड़ी की अंतरिम कस्टडी मांगी थी। निचली अदालत और गुजरात हाई कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां कोर्ट ने मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया।
गाड़ी छुड़ाने के लिए माननी होंगी ये शर्तेंसुप्रीम कोर्ट ने गाड़ी वापस करने के लिए कुछ सख्त नियम भी तय किए हैं ताकि जांच प्रभावित न हो:
- मालिक को 15 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और सिक्योरिटी देनी होगी।
- जांच अधिकारी या कोर्ट जब भी बुलाएंगे, गाड़ी पेश करनी होगी।
- गाड़ी को बेचा नहीं जा सकेगा और न ही किसी तीसरे पक्ष को दिया जा सकेगा।
- रिलीज़ से पहले पुलिस गाड़ी का पूरा वीडियो और फोटो समेत पंचनामा तैयार करेगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि गुजरात निषेध अधिनियम की धारा 98(2) का मतलब यह नहीं है कि गाड़ी को कभी रिलीज ही न किया जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि अंतरिम कस्टडी देना और गाड़ी को पूरी तरह जब्त कर लेना दो अलग बातें हैं। यह फैसला केवल संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए है, इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी पर चल रहा केस खत्म हो गया है। केस अपनी सामान्य प्रक्रिया से चलता रहेगा।