Volkswagen का बड़ा फैसला 2030 तक 1 लाख कर्मचारियों की होगी छंटनी और बंद होंगे 4 बड़े प्लांट

जर्मनी की दिग्गज कार निर्माता कंपनी Volkswagen ने एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। कंपनी ने एक ऐतिहासिक रीस्ट्रक्चरिंग प्लान का ऐलान किया है, जिसके तहत साल 2030 तक करीब 1 लाख कर्मचारियों की छंटनी की जाएगी। यह संख्या कंपनी के कुल ग्लोबल वर्कफोर्स का लगभग 15 फीसदी हिस्सा है। 3 सितंबर 2026 को कंपनी के मैनेजमेंट और यूनियन के बीच इस फैसले पर सहमति बनी है, जिसे सुपरवाइजरी बोर्ड ने भी मंजूरी दे दी है।
क्यों लिया गया इतना बड़ा कदम?Volkswagen के सीईओ ओलिवर ब्लूम ने बताया कि कंपनी के सामने इस वक्त कई बड़ी चुनौतियां हैं। अमेरिका में बढ़ते टैरिफ, इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) की मांग में आई कमी और चीन की कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर के कारण कंपनी का मुनाफा लगातार गिर रहा है। साल 2026 की पहली छमाही में कंपनी का टैक्स के बाद का मुनाफा 30 फीसदी तक गिर गया है। इसके अलावा, कंपनी की प्रोडक्शन क्षमता बाजार की मांग से 5 लाख यूनिट ज्यादा है, जिसे कम करना अब मजबूरी बन गया है।
जर्मनी के इन प्लांट पर मंडराया खतराइस फैसले का सबसे बुरा असर जर्मनी में स्थित चार मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स पर पड़ने वाला है। हनोवर, एमडेन, जविकौ और नेकर्सुलम में स्थित इन प्लांट्स में 45,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। हालांकि ये प्लांट 2030 तक सुरक्षित रहेंगे, लेकिन कंपनी ने साफ कर दिया है कि 2031 से 2034 के बीच यहां गाड़ियों का प्रोडक्शन धीरे-धीरे पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। कंपनी अब इन जगहों के लिए वैकल्पिक औद्योगिक इस्तेमाल के रास्ते तलाश रही है।
कंपनी के लिए भविष्य की तैयारीकंपनी की मुख्य कर्मचारी प्रतिनिधि डेनिएला कैवलो ने इस फैसले को कंपनी के भविष्य को बचाने के लिए एक जरूरी कदम बताया है। चीन जैसे बड़े बाजार में बिक्री घटने और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Volkswagen अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए यह कड़ा फैसला लेने को मजबूर हुई है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल छंटनी | 1,00,000 कर्मचारी |
| समय सीमा | साल 2030 तक |
| प्रभावित क्षेत्र | ग्लोबल वर्कफोर्स (15%) |
| मुख्य चुनौती | EV मांग में कमी और चीन से प्रतिस्पर्धा |
| बंद होने वाले प्लांट | हनोवर, एमडेन, जविकौ, नेकर्सुलम |