भारत सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को लेकर एक बड़ा और साफ बयान दिया है। अब तक बहुत से लोग ये मान रहे थे कि इथेनॉल की ब्लेंडिंग से पेट्रोल की कीमतें कम होंगी और आम आदमी को जेब पर राहत मिलेगी, लेकिन सरकार ने इस भ्रम को दूर कर दिया है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने का मुख्य मकसद पेट्रोल सस्ता करना बिल्कुल नहीं है।
असल में, सरकार का पूरा जोर देश को कच्चे तेल के आयात यानी क्रूड ऑयल इंपोर्ट पर निर्भरता से बाहर निकालने पर है। सरकार चाहती है कि भारत तेल के लिए दूसरे देशों पर कम निर्भर रहे और आत्मनिर्भर बने। इस पूरी प्रक्रिया में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इथेनॉल का उत्पादन करना और फिर उसे पेट्रोल के साथ मिलाना, इंटरनेशनल मार्केट में 70 डॉलर प्रति बैरल के भाव से कच्चा तेल खरीदने से भी ज्यादा महंगा पड़ रहा है।
इसका सीधा मतलब यह है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग के बावजूद ईंधन की कुल लागत कम होने के बजाय उतनी ही या उससे ज्यादा बनी हुई है। इस खुलासे के बाद अब आम जनता और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के बीच बहस छिड़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर इससे ईंधन सस्ता नहीं हो रहा, तो फिर सरकार की इस नीति का असली फायदा क्या है।
हाल ही में ऑटो सेक्टर में कई बड़े बदलाव और विवाद देखने को मिले हैं, जिसमें हुंडई i20 के पेट्रोल मॉडल से जुड़ा मामला भी काफी चर्चा में रहा था। इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर सरकार के इस ताजा रुख ने उन लोगों को हैरान कर दिया है जो उम्मीद कर रहे थे कि आने वाले दिनों में उन्हें पेट्रोल पंप पर सस्ती कीमतें देखने को मिलेंगी। फिलहाल सरकार का पूरा फोकस देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और क्रूड ऑयल की निर्भरता को कम करने पर ही है।




