सड़क पर होने वाले हादसों को कम करने के लिए अब सरकार एक नई और गजब की तकनीक लाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ‘व्ही2व्ही’ (V2V) यानी व्हीकल-टू-व्हीकल संचार प्रणाली का प्रस्ताव रखा है। इस तकनीक के आने के बाद गाड़ियां आपस में बातचीत कर सकेंगी, जिससे सड़क सुरक्षा काफी मजबूत हो जाएगी।
इस तकनीक के जरिए वाहन आपस में वास्तविक समय में जरूरी जानकारी शेयर करेंगे। इसमें गाड़ी की स्पीड, उसकी दिशा, ब्रेक लगाने या अचानक से एक्सीलरेटर दबाने जैसी जानकारी शामिल होगी। इस डेटा की मदद से गाड़ियों को संभावित खतरों का पहले ही पता चल जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाती है, तो पीछे वाली गाड़ी को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा, जिससे टक्कर का खतरा कम हो जाएगा। इतना ही नहीं, यह सिस्टम ब्लाइंड स्पॉट और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ियों के पास आने की जानकारी भी ड्राइवर को पहले ही दे देगा।
सरकार ने इस प्रणाली के लिए 5.875 गीगाहर्ट्ज से 5.925 गीगाहर्ट्ज का फ्रीक्वेंसी बैंड तय किया है। दूरसंचार विभाग ने इसके इस्तेमाल के लिए लाइसेंस की जरूरत को भी खत्म कर दिया है, जिससे इसे लागू करना आसान हो जाएगा। भविष्य में इसे ऑटोमैटिक ब्रेकिंग और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे यह और भी असरदार बन जाएगी।
इस नियम को लागू करने के लिए सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में बदलाव की योजना बनाई है। इसे चरणों में लागू किया जाएगा। सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, 1 अक्टूबर 2027 से उन वाहनों के लिए नियम लागू होंगे जिनमें यह सिस्टम लगा होगा। वहीं, 1 अक्टूबर 2028 से सभी नए वाहनों में इस तकनीक को लगाना अनिवार्य किया जा सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत की सड़कों पर यह तकनीक एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी। हालांकि, इसे पूरी तरह सफल बनाने के लिए गाड़ियों में बेहतर हार्डवेयर लगाने और डेटा सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी काम करना जरूरी होगा।
| विवरण (Details) | जानकारी (Information) |
|---|---|
| तकनीक का नाम | V2V (व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन) |
| फ्रीक्वेंसी बैंड | 5.875 GHz से 5.925 GHz |
| अनिवार्य तिथि (शुरुआत) | 1 अक्टूबर 2028 |
| मुख्य उद्देश्य | सड़क हादसों में कमी लाना |




