भारत में पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने यानी E20 फ्यूल को लेकर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और सरकार के बीच खींचतान चल रही है। हाल ही में सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने एक रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, जिसमें E20 ईंधन से होने वाले नुकसान और तकनीकी दिक्कतों का जिक्र था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस रिपोर्ट के जमा होने के महज एक हफ्ते के भीतर ही ऑटो कंपनियों ने अपनी चिंताएं वापस ले ली हैं। जानकारों का मानना है कि सरकार के कड़े रुख के चलते ऑटो कंपनियों पर इस नीति को चुपचाप स्वीकार करने का दबाव बढ़ गया है।
ऑटो कंपनियों का मुख्य डर यह है कि 20 फीसदी इथेनॉल वाला पेट्रोल गाड़ियों के इंजन की लाइफ कम कर सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि E20 में मौजूद क्लोराइड और नमी के कारण गाड़ियां बीच रास्ते में खराब हो सकती हैं। कई दिग्गज ऑटो कंपनियों ने तो पहले इस पर अपनी असहमति भी जताई थी, क्योंकि उन्हें डर था कि लंबे समय तक इस ईंधन का इस्तेमाल करने से गाड़ी के अंदरूनी पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है।
दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत में E20 का लक्ष्य बहुत तेजी से लागू किया जा रहा है। ब्राजील जैसे देशों ने इस स्तर तक पहुंचने के लिए दशकों का समय लिया, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर और गाड़ियों के इंजन को इसके मुताबिक तैयार किया जा सके। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को आर्थिक फायदा होगा और हम ईंधन के लिए दूसरे देशों पर कम निर्भर रहेंगे।
दूसरी तरफ, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं का आरोप है कि E20 के अनिवार्य होने से गाड़ियों का माइलेज घटेगा और इंजन जल्दी खराब होगा। वहीं, सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि E20 पूरी तरह से सुरक्षित है और आधुनिक गाड़ियां इसे झेलने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। अब मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने सुझाव दिया है कि पेट्रोल पंपों पर E10 ईंधन का विकल्प भी मिलना चाहिए, ताकि आम ग्राहकों को कोई परेशानी न हो। फिलहाल, यह साफ नहीं है कि सरकार इस पर क्या अंतिम फैसला लेगी।
| Fuel Type | Ethanol Blend | Current Status |
|---|---|---|
| E10 | 10% Ethanol | Widely Available |
| E20 | 20% Ethanol | Mandatory Rollout |




