भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इस बार कुछ ऐसा हुआ है जो अब तक नहीं हुआ था। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री ने पहली बार एक महीने में 3.06 लाख यूनिट्स का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। यह पिछले साल के मुकाबले 63 फीसदी की बड़ी बढ़त है, जिससे देश में कुल ईवी पैठ 12 फीसदी के पार पहुंच गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि अब लोग पेट्रोल-डीजल छोड़कर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं।
अगर बात दोपहिया वाहनों की करें, तो इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक की बिक्री 1.81 लाख से 1.93 लाख यूनिट्स के बीच रही। हर दिन करीब 6,000 नई इलेक्ट्रिक गाड़ियां सड़कों पर उतर रही हैं। इसमें टीवीएस (TVS) मार्केट लीडर बनी हुई है, जबकि हीरो (Hero) की बिक्री में भी काफी धांसू उछाल देखने को मिला है। चार पहिया वाहनों यानी इलेक्ट्रिक कारों (ePV) की बात करें तो पहली बार इनकी बिक्री 31,823 यूनिट्स तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 108 फीसदी ज्यादा है।
इलेक्ट्रिक कारों के इस सेगमेंट में टाटा मोटर्स का दबदबा कायम है, जिसने अकेले 12,000 से ज्यादा कारें बेची हैं। इसके बाद महिंद्रा ने 7,600 और जेएसडब्ल्यू एमजी ने करीब 5,800 गाड़ियां बेची हैं। इस रेस में मारुति ने भी एंट्री मार ली है और करीब 1,900 इलेक्ट्रिक कारें बेचकर अपनी शुरुआत की है।
जून महीने में कुल पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री 4.11 लाख यूनिट्स के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। सबसे खास बात यह है कि अब बाजार में सिर्फ पेट्रोल-डीजल का राज नहीं रहा। अब सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का कुल मार्केट शेयर 40.35 फीसदी हो गया है। इसमें सीएनजी की हिस्सेदारी 24.3 फीसदी, हाइब्रिड की 8.3 फीसदी और ईवी की 7.75 फीसदी है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि अब लोग सरकारी सब्सिडी के भरोसे नहीं, बल्कि गाड़ियों की क्वालिटी और फीचर्स देखकर इन्हें खरीद रहे हैं। इसे ‘प्रोडक्ट-पुल’ मार्केट कहा जा रहा है। हालांकि, 31 जुलाई को सब्सिडी में संभावित कटौती के बाद बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन फिलहाल ग्राहकों की मांग काफी मजबूत बनी हुई है।
| सेगमेंट | बिक्री (जून महीने में) |
|---|---|
| इलेक्ट्रिक वाहन (कुल) | 3.06 लाख+ यूनिट |
| इलेक्ट्रिक कार (ePV) | 31,823 यूनिट |
| कुल पैसेंजर वाहन | 4.11 लाख यूनिट |




