भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जबरदस्त प्रदर्शन दिखाया है। कच्चे माल की बढ़ती लागत और बाजार के भारी दबाव के बाद भी कंपनियों ने अपने मार्जिन को काफी हद तक बचाए रखा है। एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों ने इनपुट लागत को बेहतर तरीके से मैनेज किया है, जिससे उनके मुनाफे पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। वहीं, कमर्शियल वाहनों का प्रदर्शन भी मिला-जुला और संतोषजनक रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमोडिटी की बढ़ती कीमतें रही हैं। इससे निपटने के लिए ज्यादातर वाहन निर्माताओं ने जुलाई और अगस्त के महीनों में अपनी गाड़ियों की कीमतों में इजाफा किया है। जानकारों का मानना है कि इन बढ़ी हुई कीमतों से कंपनियों के मार्जिन को सहारा तो मिलेगा, लेकिन असली फायदा इस बात पर टिका है कि बाजार में मांग की रफ्तार कैसी रहती है। अच्छी बात यह है कि बार-बार दाम बढ़ने के बावजूद ग्राहकों की तरफ से गाड़ियों की मांग में कोई खास कमी नहीं आई है।
ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ऑटो सेक्टर में दूसरी छमाही के दौरान मिड-सिंगल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है, जो पहले लगाए गए अनुमानों से काफी बेहतर है। मानसून को लेकर जो चिंताएं पहले बनी हुई थीं, वे भी अब काफी कम हो गई हैं। हालांकि, रिपोर्ट में एक चेतावनी भी दी गई है कि अगर भविष्य में कीमतें और बढ़ती हैं, तो इसका असर ग्राहकों की खरीदने की क्षमता पर पड़ सकता है, जो आने वाले समय में ग्रोथ के लिए चुनौती बन सकता है।
इन्वेस्टमेंट के नजरिए से देखें तो फिलहाल ऑटो कंपनियों के शेयर अपने ऐतिहासिक औसत से महंगे ट्रेड कर रहे हैं। खासकर दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियां पैसेंजर गाड़ियों वाली कंपनियों के मुकाबले काफी महंगी नजर आ रही हैं। ब्रोकरेज का मानना है कि अगले एक-दो सालों में उन कंपनियों पर दांव लगाना बेहतर होगा जो सही वैल्यूएशन के साथ सुरक्षित रेवेन्यू और लंबी अवधि की ग्रोथ दिखा रही हैं।
| Key Parameter | Status |
|---|---|
| Q1 Performance | Strong |
| Growth Outlook | Mid-Single Digit |
| Major Challenge | Rising Commodity Costs |
| Price Strategy | Hiked in July-August |




