महाराष्ट्र में ओला, उबर और रैपिडो जैसी कैब और बाइक टैक्सी कंपनियों के लिए अब नियम काफी सख्त हो गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने इन सभी एग्रीगेटर कंपनियों के लिए 1 सितंबर 2026 तक राज्य परिवहन विभाग के पास अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करना अनिवार्य कर दिया है। अगर कोई कंपनी इस तारीख के बाद बिना रजिस्ट्रेशन के काम करती पकड़ी गई, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ कर दिया है कि सरकार चाहती है कि ये सभी सेवाएं कानूनी दायरे में रहकर ही काम करें।
नई गाइडलाइन्स के तहत कंपनियों को राज्य परिवहन प्राधिकरण से लाइसेंस लेना होगा, जो तीन साल के लिए वैध होगा। पैसेंजर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब कंपनियों को 24×7 कस्टमर सपोर्ट और शिकायत निवारण तंत्र बनाना होगा। ऐप में रीयल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग और लाइव जर्नी शेयरिंग का फीचर भी अनिवार्य कर दिया गया है। इतना ही नहीं, मोबाइल ऐप के लिए साइबर सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन भी जरूरी है।
गाड़ियों के लिए भी नियम कड़े किए गए हैं। अब हर गाड़ी में वैध परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस, पीयूसी और एआईएस-140 कंप्लायंट ट्रैकिंग डिवाइस के साथ पैनिक बटन होना जरूरी है। ड्राइवर को भी काम शुरू करने से पहले पांच दिन की ट्रेनिंग लेनी होगी, जिसमें सुरक्षित ड्राइविंग और दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता शामिल है।
किराये को लेकर भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब आरटीए द्वारा तय किराये के आधार पर ही बिलिंग होगी। सर्ज प्राइसिंग के दौरान कंपनियां बेस फेयर से अधिकतम 1.5 गुना ज्यादा और कम से कम 25 फीसदी कम किराया ले सकेंगी। सबसे बड़ी राहत ड्राइवरों को मिली है, क्योंकि अब कुल किराये का कम से कम 80 फीसदी हिस्सा ड्राइवर को ही मिलेगा। अगर गाड़ी बीच रास्ते में खराब होती है, तो कंपनी को 30 मिनट के भीतर दूसरा विकल्प देना होगा। वहीं, दूसरी ओर कर्नाटक में भी अवैध बाइक टैक्सी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की जा रही है, जिसमें गाड़ियों को जब्त करने और लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
| नियम/सुविधा | विवरण |
|---|---|
| रजिस्ट्रेशन डेडलाइन | 1 सितंबर 2026 |
| ड्राइवर का हिस्सा | कुल किराये का न्यूनतम 80% |
| सर्ज प्राइसिंग | बेस फेयर का अधिकतम 1.5 गुना |
| बीमा कवर | न्यूनतम 5 लाख रुपये (यात्री के लिए) |
| वर्किंग आवर्स | लगातार 12 घंटे से ज्यादा नहीं |




