केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी से खुद को अलग करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में 11 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। यह मामला सोशल मीडिया पर चल रहे उन डीपफेक वीडियो से जुड़ा है, जिनमें दावा किया गया था कि गडकरी ने इस नीति से अपने परिवार को फायदा पहुंचाया है। मंत्री ने साफ कहा है कि इथेनॉल उत्पादन में उनके परिवार की हिस्सेदारी 0.5 फीसदी से भी कम है और इसकी कीमतें सरकार तय करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि E20 ईंधन पूरी तरह सुरक्षित है और इंजन खराब होने के दावे बेबुनियाद हैं।
इधर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी E20 ईंधन को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया है। मंत्रालय का कहना है कि सिर्फ E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के कारण किसी भी गाड़ी का इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट नहीं किया जा सकता। इंजन में खराबी या कीड़े लगने जैसी बातें वैज्ञानिक रूप से गलत हैं। हालांकि, मंत्रालय ने यह माना है कि कुछ गाड़ियों में माइलेज पर 3 से 5 फीसदी तक का असर पड़ सकता है, खासकर हाईवे पर चलते समय। शहर की ड्राइविंग में इसका असर न के बराबर है।
पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने यह भी साफ कर दिया है कि XP100, poWer100 और Speed100 जैसे प्रीमियम पेट्रोल में इथेनॉल नहीं मिलाया जाता है और फिलहाल सामान्य पेट्रोल में E0 या E10 वापस लाने की कोई योजना नहीं है। सरकार के मुताबिक, 2023 से पहले खरीदी गई कुछ पुरानी BS-III गाड़ियों में रबर के पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है।
| विषय (Subject) | विवरण (Details) |
|---|---|
| E20 नीति का फैसला | पेट्रोलियम मंत्रालय और कैबिनेट का निर्णय |
| माइलेज पर असर | 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी संभव |
| प्रीमियम पेट्रोल | XP100, poWer100 और Speed100 में इथेनॉल नहीं |
| इंजन सुरक्षा | मंत्रालय ने दावों को आधारहीन बताया |
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन की क्वालिटी चेक करने के लिए एक स्वतंत्र सिस्टम होना चाहिए, क्योंकि कई बार पेट्रोल में नमी और क्लोराइड की मात्रा ज्यादा होने की खबरें आती हैं। सरकार ने अभी तक उन गाड़ियों का कुल आंकड़ा नहीं दिया है जो पूरी तरह से E20 के लिए तैयार हैं।




