अक्सर हम कार खरीदने का सपना देखते हैं और उसे अपनी शान-ओ-शौकत से जोड़कर देखते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या वाकई हर व्यक्ति के पास अपनी कार होना जरूरी है? ऑटो एक्सपर्ट डॉ. शैलेश शुक्ला का मानना है कि अब समय बदल चुका है और हमें कार खरीदने की अपनी पुरानी सोच से बाहर निकलने की जरूरत है। उन्होंने कार खरीदने के बजाय रेंटल कार या रेंटल सर्विस के इस्तेमाल को आज के दौर के लिए बेहतर बताया है।
डॉ. शुक्ला के अनुसार, 20वीं सदी में अपनी कार होना आधुनिकता और आजादी की निशानी माना जाता था। लेकिन 21वीं सदी के तीसरे दशक में हालात बदल गए हैं। आज बढ़ता प्रदूषण, ट्रैफिक जाम, ईंधन का संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं हमारे सामने खड़ी हैं। ऐसे में कार खरीदना सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा बन गया है। उन्होंने साफ कहा है कि हम अक्सर भावनाओं में बहकर कार खरीद लेते हैं, जबकि इसका असली असर हमारी जेब पर पड़ता है।
रेंटल कार क्यों है बेहतर विकल्प?
एक्सपर्ट का कहना है कि कार खरीदना एक महंगा सौदा है। कार की कीमत के साथ-साथ मेंटेनेंस, इंश्योरेंस और पार्किंग का खर्च भी सिरदर्द बन जाता है। इसके विपरीत रेंटल कार या शेयरिंग ट्रांसपोर्ट सर्विस का इस्तेमाल करना न केवल आर्थिक रूप से सस्ता है, बल्कि यह समय और ऊर्जा की भी बचत करता है। जब आप रेंटल कार लेते हैं, तो आपको गाड़ी की देखरेख की चिंता नहीं करनी पड़ती।
डॉ. शैलेश शुक्ला ने यह भी जोर दिया कि रेंटल और शेयरिंग ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना भविष्य के लिए एक जिम्मेदारी है। यह शहरी भीड़ को कम करने में मदद करता है और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान देता है। अगर हम कार खरीदने की जिद छोड़कर रेंटल सर्विस को अपनाते हैं, तो यह न केवल हमारे लिए किफायती होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और साफ-सुथरा भविष्य भी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे ओनरशिप यानी मालिकाना हक के बजाय सुविधा और जरूरत को प्राथमिकता दें।
| Index | Details |
|---|---|
| Ownership Cost | High (EMI, Insurance, Maintenance) |
| Rental/Shared Cost | Low (Pay per use only) |
| Environmental Impact | Rental services help reduce traffic and pollution |
| Convenience | No headache of parking or service |



