दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एक वोल्वो कार मालिक ने अपनी गाड़ी का पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) न मिलने के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने याचिका पर विचार करने के लिए सहमति दे दी है। याचिकाकर्ता की गाड़ी का PUCC 25 फरवरी 2026 को खत्म हो गया था, जिसके बाद पेट्रोल पंपों पर तेल मिलना बंद हो गया, जिससे गाड़ी सड़क पर चलाने लायक नहीं बची है।
मौजूदा नियमों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर पूरी तरह बैन है, चाहे गाड़ी की हालत कितनी भी अच्छी क्यों न हो। एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आयोग (CAQM) ने आदेश दिया था कि 1 जुलाई 2025 से ही पुराने वाहनों को तेल देना बंद कर दिया जाए। अब दिल्ली के लगभग 500 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो सीधे ‘वाहन’ डेटाबेस से गाड़ी की उम्र चेक कर लेते हैं।
इस मामले में पहले भी कई आदेश आए हैं। 12 अगस्त 2025 को कोर्ट ने पुरानी गाड़ियों पर सख्त कार्रवाई न करने की राहत दी थी, जिसे बाद में 17 दिसंबर 2025 को बदलकर केवल BS-III और उससे पुरानी गाड़ियों तक सीमित कर दिया गया। यानी अब BS-IV और उसके बाद की गाड़ियों को लेकर स्थिति थोड़ी अलग है।
दिल्ली सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। सरकार का तर्क है कि उम्र के आधार पर गाड़ियों को बैन करना मिडिल क्लास परिवारों के लिए बहुत महंगा और गलत है। सरकार का मानना है कि बैन लगाने के बजाय गाड़ी की फिटनेस और उससे होने वाले प्रदूषण के स्तर के आधार पर नीति बननी चाहिए। अब हर किसी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है कि क्या पुरानी गाड़ियों के मालिकों को कोई बड़ी राहत मिलेगी या नहीं।
| Index | Detail |
|---|---|
| Delhi Diesel Ban | 10 Years |
| Delhi Petrol Ban | 15 Years |
| Enforcement Tech | ANPR Cameras |
| Current Status | Supreme Court Hearing |




